रोगन जोश
कश्मीर की खुशबूदार मटन करी: मुलायम मटन के टुकड़े दही वाली ग्रेवी में पकते हैं जो कश्मीरी मिर्च से चमकदार लाल होती है (रंग के लिए, तीखेपन के लिए नहीं), और सौंफ, अदरक, इलायची व लौंग से महकती है। कई करियों के उलट यह प्याज़-भारी बेस के बजाय इन गर्म मसालों और सोंठ पर टिकी है — खुशबूदार, समृद्ध, और दावत की शान।
मटन के टुकड़े भूनें, फिर ग्रेवी बनाएँ: तेल में साबुत मसाले (इलायची, लौंग, तेजपत्ता, दालचीनी) तड़काएँ, अदरक-लहसुन डालें, फिर पिसे मसाले — खूब कश्मीरी मिर्च (रंग के लिए), सौंफ, धनिया और थोड़ी हींग। दही थोड़ा-थोड़ा कर मिलाएँ ताकि फटे नहीं, मटन और थोड़ा पानी डालकर धीमी आँच पर तब तक पकाएँ जब तक मटन गल जाए और ऊपर लाल तेल चमके। गरम मसाला से खत्म करें, चावल या नान के साथ परोसें।
- कश्मीरी मिर्च गहरा लाल रंग देती है पर तीखापन हल्का — यह रंग के लिए है, आग के लिए नहीं।
- दही तेज़ उबाल से हटाकर थोड़ा-थोड़ा, चलाते हुए मिलाएँ ताकि ग्रेवी समृद्ध हो, फटे नहीं।
- पिसी सौंफ और सोंठ इसके खास सुगंध हैं — प्याज़ या टमाटर से ज़्यादा।
Equipment
- भारी पतीला या डच ओवन
- करछी
सामग्री
मटन और साबुत मसाले
- 800 g मटन (कंधा), टुकड़ों में
- 30 ml घी या तेल
- 4 हरी इलायची, 2 बड़ी इलायची, 4 लौंग
- 1 दालचीनी, 2 तेजपत्ता
ग्रेवी
- 1 बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट
- 15 g कश्मीरी मिर्च पाउडर, रंग के लिए
- 1 बड़ा चम्मच पिसी सौंफ, 1 बड़ा चम्मच धनिया पाउडर
- 1 छोटा चम्मच सोंठ, चुटकी हींग
- 200 g दही, फेंटा हुआ
- नमक; अंत में 1 छोटा चम्मच गरम मसाला
विधि
- स्टेप01
घी में मटन को बैचों में अच्छी तरह भूनें, फिर निकालें। (या पतीले में ही भूनकर आगे बढ़ें।)
- स्टेप02
उसी पतीले में इलायची, लौंग, दालचीनी और तेजपत्ता कुछ सेकंड भूनें जब तक खुशबू आए, फिर अदरक-लहसुन पेस्ट डालकर 1 मिनट पकाएँ।
- स्टेप03
कश्मीरी मिर्च, सौंफ, धनिया, सोंठ और हींग डालें और थोड़े पानी के साथ हल्का भूनें ताकि जलें नहीं — तेल गहरा लाल हो जाता है।
- स्टेप04
पतीले को तेज़ उबाल से हटाएँ और फेंटा दही थोड़ा-थोड़ा मिलाएँ ताकि फटे नहीं। मटन लौटाएँ, नमक डालें, थोड़ा पानी डालकर धीमे उबाल पर लाएँ।
- स्टेप05
ढककर धीमी आँच पर मटन गलने और ग्रेवी समृद्ध होकर ऊपर लाल तेल चमकने तक पकाएँ, करीब 1¼ घंटा। गरम मसाला मिलाएँ। बासमती चावल या नान के साथ परोसें।
Make ahead
एक-दो दिन पहले बनाएँ — मसाले और मटन रातभर में घुलते-मिलते और गहराते हैं। धीरे गरम करें; परोसते समय ताज़ा गरम मसाला डालें।
Storage
फ्रिज में 4 दिन और 3 महीने जमती है — और ज़्यादातर भुनी करियों की तरह अगले दिन और अच्छी। थोड़े पानी के साथ धीरे गरम करें। दावत के लिए बढ़िया मेक-अहेड।
Variations
बकरा/मटन
कश्मीर में परंपरागत रूप से बकरे/मटन से — गलने तक थोड़ा ज़्यादा पकाएँ।
रतनजोत के साथ
तेल में रतनजोत भिगोकर कश्मीरी मिर्च के साथ असली कश्मीरी लाल रंग पाएँ।
टमाटर वाली
कुछ रेस्तरां संस्करण टमाटर और प्याज़ डालकर गाढ़ी, मीठी ग्रेवी बनाते हैं (कम परंपरागत)।
Serve with
Nutrition per serving
Nutrition values are estimates based on the metric measurements. Adjust as needed.
अक्सर पूछे जाने वाले
क्या रोगन जोश बहुत तीखा है?
नहीं — गहरे लाल रंग के बावजूद रोगन जोश तीखे से ज़्यादा खुशबूदार है। लाल रंग ज़्यादातर कश्मीरी मिर्च से आता है, जो चमकीले रंग और हल्के तीखेपन के लिए जानी जाती है। स्वाद सौंफ, इलायची, लौंग और सोंठ जैसे गर्म मसालों पर टिका है। ज़्यादा तीखा चाहिए तो तेज़ मिर्च डालें।
खास कश्मीरी मिर्च ही क्यों?
कश्मीरी मिर्च पाउडर हल्के तीखेपन के साथ वह चमकदार लाल रंग देती है जो रोगन जोश के रूप और संतुलन का केंद्र है। साधारण मिर्च पाउडर बहुत तीखा होता है और वैसा परिणाम नहीं देगा। न मिले तो रंग के लिए मीठी पपरिका और स्वाद के लिए थोड़ी तेज़ मिर्च।
दही फटने से कैसे रोकें?
दही पहले फेंटकर चिकना करें, पतीले को तेज़ उबाल से हटाएँ, और थोड़ा-थोड़ा मिलाएँ, हर बार घुलने दें फिर और डालें। पकाते समय आँच धीमी (तेज़ उबाल नहीं) रखने से वह दानेदार होकर नहीं फटता।
मटन का कौन सा हिस्सा सबसे अच्छा?
मटन का कंधा, टुकड़ों में — इसमें पर्याप्त चर्बी और कोलैजन होता है जो लंबे पकाने में गलकर समृद्ध हो जाता है। रान भी चलती है पर ज़्यादा लीन और सूखी हो सकती है। कश्मीर में बकरा/मटन सबसे परंपरागत, बस गलने में थोड़ा ज़्यादा समय।
रोगन जोश दूसरी मटन करियों से कैसे अलग है?
इसका कश्मीरी चरित्र: दही वाली ग्रेवी कश्मीरी मिर्च (और परंपरागत रूप से रतनजोत) से रंगी, सौंफ और सोंठ से खूब महकती, और अक्सर उत्तर भारतीय करियों के भारी प्याज़-टमाटर बेस के बिना बनी। यह तीखी या खट्टी से ज़्यादा खुशबूदार और गर्माहट भरी है।
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